शाहपुरा के ब्रह्माकुमारी राजयोग केंद्र पर मम्मा का अव्यक्त दिवस मना कर लगाया भोग

भीलवाड़ा समाचार 
शाहपुरा-मूलचन्द पेसवानी 
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शाहपुरा राजयोग सेवा केंद्र पर संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती मम्मा का अव्यक्त दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर भोग लगा कर उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को याद किया गया। 
कार्यक्रम की शुरुआत ईश्वरीय स्मृति के गीत के साथ प्रभु चिंतन करो प्रभु प्यारों, दो घड़ी मन प्रभु से लगा लो से की गई।
मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए केंद्र संचालिका बीके संगीता बहन ने कहा, मातेश्वरी के जीवन में समर्पण भाव बहुत था। मातेश्वरी अपनी त्याग-तपस्या से हर मनुष्य आत्मा के दिल में आज भी बसती हैं। सत्य ही ज्ञान है, सत्य ही विज्ञान और सत्य ही ईश्वर है। हम समाज के लिए, देश के लिए दुनिया के लिए अपना जीवन मातेश्वरीजी की भांति समर्पित करें तो ही जीवन की सार्थकता है। तभी मातेश्वरी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
राजयोग की शिक्षा का महत्व बताते हुए बीके संगीता ने कहा, आत्मा और परमात्मा का मिलन ही राजयोग है। अपनी इंद्रियों और कर्मेंद्रियों पर शासन करना ही राजयोग है। उन्होने राजयोग का अभ्यास भी कराया। उन्होंने कहा, मातेश्वरी जगदम्बा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका थी तथा इस यज्ञ की प्रथम यज्ञ माता स्थापित हुई। सन 1936 में मातेश्वरी 18 वर्ष की आयु में यज्ञ में आई और नारी जाति की आध्यात्मिक प्रेरणा स्रोत बनी। उन्होंने यज्ञ को सर्व दैहिक बंधनों से मुक्त कराया। मातेश्वरी के संकल्प, बोल और कर्म एक समान थे। उनकी प्रेरणा से लाखों भाई-बहन आध्यात्मिकता से जुड़े और अपना जीवन मानव से देवतुल्य बनाया। 
बीके संगीता ने कहा कि मम्मा सर्व गुणों की खान और मानवीय मूल्यों की विशेषताओं से सम्पन्न थीं। मम्मा ने कभी किसी को मौखिक शिक्षा नहीं दी बल्कि अपने प्रैक्टीकल जीवन से प्रेरणा दी। इसी से दूसरे के जीवन में परिवर्तन आ जाता था। मम्मा के सामने चाहे कितना भी विरोधी, क्रोधी, विकारी, नशेड़ी आ जाता परन्तु मम्मा की पवित्रता, सौम्यता व ममतामयी दृष्टि पाते ही वह शांत हो जाता और मम्मा के कदमों में गिर जाता।